यमुनोत्री धाम में बाउंसरों की तैनाती पर छिड़ी बहस: सुरक्षा व्यवस्था या अनावश्यक भय का माहौल?

यमुनोत्री धाम में बाउंसरों की तैनाती पर छिड़ी बहस: सुरक्षा व्यवस्था या अनावश्यक भय का माहौल?

Debate Erupts Over Deployment of Bouncers at Yamunotri Dham

Debate Erupts Over Deployment of Bouncers at Yamunotri Dham

बड़कोट। Debate Erupts Over Deployment of Bouncers at Yamunotri Dham, विश्व प्रसिद्ध यमुनोत्री धाम में यात्रा सीजन के दौरान तीर्थयात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या के बीच कुली एजेंसी की ओर से चार बाउंसरों की तैनाती किए जाने से क्षेत्र में नई बहस शुरू हो गई है।

धाम में घोड़े-खच्चर संचालकों, डंडी-कंडी मजदूरों और अन्य श्रमिकों की बढ़ती मौजूदगी के बीच इस कदम को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। वहीं, इससे सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

बाउंसरों की आवश्यकता क्यों पड़ी?

स्थानीय लोगों और मजदूरों का कहना है कि धाम क्षेत्र में पहले से पुलिस बल और आईटीबीपी के जवान तैनात हैं, ऐसे में बाउंसरों की आवश्यकता क्यों पड़ी। कुछ लोगों ने इसे यात्रा व्यवस्था बनाए रखने और अव्यवस्था रोकने के लिए जरूरी कदम बताया, जबकि कई लोगों का मानना है कि इससे पहाड़ की शांत फिजाओं में भय और असहजता का माहौल बन सकता है।

जिला पंचायत कुली एजेंसी इंचार्ज शत्रुघन सिंह राणा ने बताया कि यात्रा सीजन में कई बार कुछ मजदूर रोटेशन व्यवस्था तोड़कर यात्रियों को ले जाने का प्रयास करते हैं, जिससे विवाद और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि एजेंसी व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और अनुशासन कायम रखने के उद्देश्य से बाउंसरों की तैनाती की गई है।

वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता संदीप राणा ने इस निर्णय पर आपत्ति जताते हुए कहा कि धार्मिक और शांत वातावरण वाले यमुनोत्री धाम में पहले से पर्याप्त सुरक्षा बल मौजूद हैं। ऐसे में बाउंसरों की तैनाती से स्थानीय लोगों, मजदूरों और यात्रियों के बीच अनावश्यक भय का माहौल बन सकता है। उन्होंने प्रशासन से इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

धाम क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं। अब लोगों की नजर प्रशासन पर टिकी है कि बाउंसरों की यह तैनाती केवल अस्थायी व्यवस्था है या भविष्य में भी इसे जारी रखा जाएगा।